PM Rahat Yojana 2026: सड़क हादसों में अब पैसे नहीं बनेंगे जान के दुश्मन

Hari
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सड़क दुर्घटना के बाद का वह पहला घंटा, जिसे चिकित्सा विज्ञान में 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) कहा जाता है, किसी भी व्यक्ति के जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे निर्णायक घड़ी होती है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 50% मृत्यु केवल इसलिए होती हैं क्योंकि पीड़ितों को इस कीमती समय के भीतर उचित चिकित्सा नहीं मिल पाती। अक्सर अस्पताल पहुंचने पर प्रारंभिक जमा राशि (Initial Deposit) की मांग या जटिल कागजी कार्रवाई जान बचाने में बाधा बनती है।

इसी गंभीर संकट के समाधान हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नए कार्यालय 'सेवा तीर्थ' से 'सेवा और करुणा' के संकल्प के साथ अपना पहला बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है—PM RAHAT (Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment) योजना। यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है, जो भारत की '4E रणनीति' (Education, Engineering, Enforcement, Emergency Care) के 'आपातकालीन देखभाल' स्तंभ को मजबूती प्रदान करती है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों को 50% तक कम करना है।

PM Rahat Yojana 2026: सड़क हादसों में अब पैसे नहीं बनेंगे जान के दुश्मन

वित्तीय सीमा एवं कवरेज अवधि: ₹1.5 लाख तक नकद रहित इलाज

PM RAHAT योजना का प्राथमिक उद्देश्य वित्तीय बाधाओं को हटाकर त्वरित उपचार सुनिश्चित करना है। यह योजना न केवल एक आश्वासन है, बल्कि सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति के लिए एक सुरक्षा गारंटी है।

  • कैशलेस (नकद रहित) उपचार: प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना की स्थिति में ₹1.5 लाख तक का नकद रहित उपचार प्रदान किया जाएगा।
  • 7 दिनों की सुरक्षा: यह वित्तीय कवरेज दुर्घटना की तिथि से अगले 7 दिनों तक वैध रहेगा।
  • प्रवेश बाधाओं की समाप्ति: अब सूचीबद्ध निजी और सरकारी अस्पताल इलाज शुरू करने के लिए किसी भी अग्रिम भुगतान या 'डिपॉजिट' की मांग नहीं कर सकेंगे।

"सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के शोध के अनुसार, यदि पीड़ितों को 'गोल्डन आवर' के भीतर अस्पताल में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया जाए, तो सड़क दुर्घटना में होने वाली 50% से अधिक मौतों को सफलतापूर्वक टाला जा सकता है।"

स्टेबलाइजेशन विंडो': समय-संवेदी चिकित्सा हस्तक्षेप

यह योजना केवल बिलों के भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय-क्रिटिकल इंटरवेंशन (Time-critical intervention) पर केंद्रित है। इसका मुख्य लक्ष्य पीड़ित की स्थिति को 'स्थिर' (Stabilize) करना है ताकि उसकी जान बचाई जा सके।

योजना के तहत स्टेबलाइजेशन (स्थिरीकरण) के लिए विशिष्ट समय सीमा निर्धारित की गई है:

  • गैर-प्राणघातक मामले (Non-life-threatening): पीड़ित की स्थिति स्थिर करने हेतु 24 घंटे तक का उपचार।
  • प्राणघातक मामले (Life-threatening/Critical): यदि स्थिति अत्यंत गंभीर है, तो स्टेबलाइजेशन विंडो को 48 घंटे तक विस्तारित किया जाता है।

इस विशिष्ट विंडो का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सक बीमा क्लेरेंस या पुलिस रिपोर्ट की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल जीवन रक्षक प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दे सकें।

एकीकृत 112 हेल्पलाइन और 'नेक मददगार' की भूमिका

PM RAHAT योजना को तकनीक के माध्यम से 'ऑटो-एक्टिवेटेड' बनाया गया है। इसे 'इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम' (ERSS) की 112 हेल्पलाइन के साथ एकीकृत किया गया है।

  • नेक मददगार (Good Samaritan): दुर्घटना स्थल पर मौजूद कोई भी राहगीर या प्रत्यक्षदर्शी 112 डायल कर सकता है। नए नियमों के तहत, मदद करने वाले व्यक्ति को पुलिस या अस्पताल द्वारा अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा।
  • त्वरित समन्वय: कॉल प्राप्त होते ही डिजिटल सिस्टम स्वचालित रूप से निकटतम अधिकृत ट्रॉमा सेंटर या अस्पताल की पहचान करता है और एम्बुलेंस समन्वय सुनिश्चित करता है।
  • कागजी कार्रवाई से पहले उपचार: यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से संचालित है, जिससे कागजी औपचारिकताएं जान बचाने के मार्ग में बाधा नहीं बनतीं।

डिजिटल अवसंरचना: eDAR और TMS 2.0 का समन्वय

योजना की पारदर्शिता और गति इसके तकनीकी ढांचे पर टिकी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) इस योजना की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है, जो एक सुदृढ़ डिजिटल ईकोसिस्टम के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।

  • eDAR (Electronic Detailed Accident Report): सड़क परिवहन मंत्रालय का यह पोर्टल दुर्घटना की रियल-टाइम रिपोर्टिंग और सत्यापन सुनिश्चित करता है।
  • TMS 2.0 (Transaction Management System): NHA का यह पोर्टल दावों (Claims) के प्रसंस्करण के लिए उपयोग किया जाता है।
  • पुलिस प्रमाणीकरण (Authentication): जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को गैर-गंभीर मामलों में 24 घंटे और गंभीर मामलों में 48 घंटे के भीतर डिजिटल सत्यापन करना अनिवार्य है।
  • भुगतान की गारंटी: राज्य स्वास्थ्य एजेंसियां (SHA) स्वीकृत दावों का भुगतान अस्पतालों को 10 दिनों के भीतर करेंगी, जिससे अस्पतालों के लिए वित्तीय तरलता बनी रहे।

समावेशी सुरक्षा: हिट-एंड-रन और गैर-बीमाकृत मामले

PM RAHAT योजना की सबसे मानवीय विशेषता इसकी व्यापकता है। यह योजना पीड़ित की पात्रता को वाहन की बीमा स्थिति से अलग रखती है।

  • बीमित वाहन: यदि दुर्घटना करने वाला वाहन बीमित है, तो उपचार का खर्च सामान्य बीमा कंपनियों द्वारा मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) में दिए गए अंशदान से किया जाएगा।
  • हिट-एंड-रन और अनइंश्योर्ड: यदि टक्कर मारने वाला वाहन फरार है या उसका बीमा नहीं है, तब भी पीड़ित को पूर्ण उपचार मिलेगा। इसका खर्च भारत सरकार अपने बजटीय आवंटन और MVAF के माध्यम से वहन करेगी।
  • सार्वभौमिक पात्रता: भारत की सड़कों पर दुर्घटना का शिकार होने वाला कोई भी व्यक्ति—चाहे वह भारतीय नागरिक हो या विदेशी पर्यटक—इस योजना के लिए पूर्णतः पात्र है। आधार कार्ड न होने की स्थिति में भी आपातकालीन उपचार से इनकार नहीं किया जा सकता।

महत्वपूर्ण संपर्क और आधिकारिक संसाधन

आपातकालीन स्थिति में सहायता प्राप्त करने हेतु निम्नलिखित संसाधनों का उपयोग करें:

निष्कर्ष: एक सुरक्षित भारत की ओर बढ़ते कदम

PM RAHAT योजना केवल एक चिकित्सा सहायता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक संवेदनशील राष्ट्र के संकल्प का प्रतिबिंब है। तकनीकी एकीकरण (eDAR/TMS 2.0) और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचे (NHA/SHA) के साथ, यह योजना भारत में सड़क सुरक्षा के प्रति हमारे नजरिए को 'प्रतिक्रियात्मक' से 'निवारक' में बदल रही है। 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को आधा करने का लक्ष्य अब केवल एक सांख्यिकीय उद्देश्य नहीं, बल्कि एक प्राप्त होने योग्य वास्तविकता प्रतीत होता है।

अंत में एक विचार: क्या हम एक जिम्मेदार समाज के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं, जहाँ सड़क पर घायल किसी अजनबी की जान बचाना अब हमारी कानूनी सुरक्षा के साथ-साथ एक सर्वोच्च नैतिक कर्तव्य भी बन गया है?

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